नरोत्तम मिश्रा ने शामिल हुईं धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की ‘सनातन हिंदू एकता पदयात्रा’, बोले– ‘सनातन अमृत है’
पलवल। मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने बुधवार (12 नवंबर) को बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की “सनातन हिंदू एकता पदयात्रा” में हिस्सा लिया। यह यात्रा पूरे उत्तर भारत में हिंदू एकता, जातिवाद के उन्मूलन और हिंदू राष्ट्र की स्थापना के संदेश के साथ निकाली जा रही है।
‘सनातन अमृत है…कई लोगों को हजम नहीं होता’
पदयात्रा के छठवें दिन शामिल हुए नरोत्तम मिश्रा ने जनसनूह को संबोधित करते हुए कहा कि जो लोग सनातन का विरोध कर रहे हैं, वे कीचड़ और लीचड़ के समान हैं। कीचड़ तन खराब करता है और लीचड़ मन खराब करता है, इसलिए इनसे दूर रहना ही बेहतर है।सनातन अमृत है, लेकिन जैसे देशी घी, शहद और मिश्री औषधि हैं, फिर भी जिन्हें नहीं हजम होती, वे मर जाते हैं। वैसे ही सनातन भी अमृत है, लेकिन कई लोगों को हजम नहीं होता।
‘सनातन धर्म महान है’
उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि वे किसी की तुलना जानवरों से नहीं कर रहे हैं बल्कि यह उदाहरण देना चाहते हैं कि सनातन धर्म की महानता इतनी गहरी है कि उसे हर कोई समझ नहीं सकता। डॉ. मिश्रा ने कहा कि महाराज धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जो अभियान चला रहे हैं, वह भारत की आत्मा को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास है। सनातन विरोधी समाज में जहर घोलना चाहते हैं लेकिन सनातन सच्चाई, सद्भाव और आत्मबल का प्रतीक है।
मथुरा पहुंचेगी पदयात्रा
बाबा बागेश्वर की पदयात्रा का आज (गुरुवार)सातवां दिन है. यात्रा 7 नवंबर को दिल्ली के छतरपुर के कात्यायनी मंदिर से शुरू हुई थी और 16 नवंबर को वृंदावन में समाप्त होगी। सातवें दिन पदयात्रा मथुरा में प्रवेश करेगी कोटवन बॉर्डर होते हुए वृंदावन जाएंगे, अगले 4 दिन यात्रा मथुरा जिले में ही रहेगी।

नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने पेड नेगेटिव PR पर जताई चिंता, बोले— “ये क्रिएटिविटी के लिए बुरा समय”
ममता बनर्जी का बड़ा दावा—इस बार भी TMC की ही सरकार बनेगी!
सिद्ध नाथ का कार्यकाल 6 माह बढ़ा, गृह मंत्री का बड़ा बयान
सागर रबारी का इस्तीफा, गुजरात में AAP को बड़ा झटका
Dindori के चंद्रागढ़ बालक आश्रम में फिर बड़ी लापरवाही
West Central Railway Employees Union के महामंत्री मुकेश गालव ने की सौजन्य भेंट
स्वास्थ्य मंत्रालय की चेतावनी—लाइफस्टाइल बीमारियां सबसे बड़ा खतरा