बच्चों की दुनिया पर बनी फिल्मों का कमाल, ‘तारे ज़मीन पर’ और ‘चिल्लर पार्टी’ समेत कई हुईं अवॉर्डेड
मुंबई: भारत में हर साल 14 नवंबर को बाल दिवस मनाया जाता है। यह इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इस दिन भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती है। नेहरू जी बच्चों से प्यार करते थे और मानते थे कि बच्चे कल के भारत के निर्माता हैं। भारतीय सिनेमा ने बच्चों पर आधारित कई फिल्में बनाई हैं। इन में से कुछ ने अवॉर्ड जीते हैं। आइए इन फिल्मों के बारे में जान लेते हैं।
सुमी (2020)
यह मराठी भाषा की फिल्म है। इसमें एक ऐसी लड़की की कहानी दिखाई गई है जो गरीब है और पढ़ना चाहती है। उसका स्कूल बहुत दूर है इसलिए वह एक साइकिल लेना चाहती है। बच्चों की सबसे अच्छी फिल्म और सबसे अच्छी अदाकारी के लिए इसे 68वां नेशनल अवॉर्ड दिया गया।
कस्तूरी (2019)
इस फिल्म में एक ऐसे बच्चे की कहानी दिखाई गई है जो अपने पिता की साफ-सफाई में मदद करता है। फिल्म में शिक्षा के लिए संघर्ष और जातिगत भेदभाव को दिखाया गया है। इस फिल्म को बच्चों की सबसे अच्छी फिल्म के लिए 67वां नेशनल फिल्म अवार्ड दिया गया।
धनक (2016)
इस फिल्म में भाई-बहन के रिश्ते को दिखाया गया है। बड़ी बहन अपने छोटे भाई, जो कि नेत्रहीन है उसकी मदद के लिए शाहरुख खान से मिलना चाहती है। उसे लगता है कि वह उनकी मदद कर सकते हैं। फिल्म को 64वां नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया।
बुधिया सिंह- बॉर्न टू रन (2015)
यह फिल्म दुनिया के सबसे कम उम्र के मैराथन धावक बुधिया सिंह की सच्ची कहानी पर आधारित है। फिल्म में बुधिया और उसके कोच, बिरंची दास, के रिश्तों को दिखाया गया है। बच्चों की सबसे अच्छी फिल्म के लिए इसे 63वां नेशनल फिल्म अवॉर्ड दिया गया।
काका मुत्तई (2014)
यह तमिल फिल्म है, जिसमें झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले बच्चों की कहानी दिखाई गई है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे छोटी जगहों के बच्चे सपने देखने लगते हैं और उन्हें पूरा करने की कोशिश करते हैं। फिल्म को बेहतरीन फिल्म के लिए नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला।
एलिजाबेथ एकादशी (2014)
मराठी भाषा की इस फिल्म को भी काफी सराहना मिली थी। बच्चों पर आधारित इस फिल्म में दिखाया गया है कि गरीबी की वजह से अगर किसी चीज को बेचना पड़ता है, तो बच्चों पर इसका क्या असर पड़ता है। इस फिल्म को नेशनल फिल्म अवॉर्ड से नवाजा गया था।
कफल (2013)
बच्चों पर आधारित यह फिल्म उत्तराखंड के एक गांव की कहानी बताती है। इसमें पलायन और पिता-पुत्र के रिश्ते को दिखाया गया है। बतुल मुख्तियार के निर्देशन में बनी इस फिल्म को 62वां नेशनल फिल्म अवॉर्ड दिया गया।
देख इंडियन सर्कस (2012)
बच्चों पर आधारित इस फिल्म में ग्रामीण भारत की कहानी दिखाई गई है। इसमें एक परिवार अपने बच्चों को शिक्षा देने के लिए संघर्ष करता है। नवाजुद्दीन सिद्दीकी और तनिष्ठा चटर्जी ने इसमें अहम किरदार निभाया है। इसे 60वां नेशनल फिल्म अवॉर्ड दिया गया।
चिल्लर पार्टी (2011)
'चिल्लर पार्टी' बच्चों पर आधारित कॉमेडी फिल्म है। इसमें दिखाया गया है कि बच्चे आपस में मिलकर योजना बना सकते हैं और एक मकसद के लिए काम कर सकते हैं। फिल्म को सबसे अच्छी फिल्म के लिए 59वां नेशनल अवॉर्ड दिया गया। फिल्म को नौ बाल कलाकारों के लिए भी खास पुरस्कार भी मिला।
तारे जमीन पर (2007)
इस फिल्म में एक ऐसे बच्चे की कहानी दिखाई गई है जो डिस्लेक्सिया से पीड़ित होता है। उसके प्रति उसके पिता का व्यवहार काफी सख्त होता है। इसमें आमिर खान ने अहम किरदार निभाया है। फिल्म को नेशनल फिल्म अवॉर्ड से नवाजा गया था।

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