मऊगंज में मंदिर की चौखट पर नशे का धंधा, प्रशासन बना मूकदर्शक
मऊगंज। मऊगंज जिले के हनुमान जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत खूंटा बेदौलिहान से सामने आया मामला न केवल गंभीर है, बल्कि प्रशासनिक कार्यशैली पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है. यहां मंदिर परिसर से सटी शासकीय भूमि पर खुलेआम अवैध कब्जा कर नशे का कारोबार बेखौफ तरीके से संचालित किया जा रहा है।
अवैध कब्जा कर बनाया शराब का अड्डा
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत ने मंदिर के बगल स्थित सरकारी भूमि पर सामुदायिक भवन निर्माण की स्वीकृति कराई थी, ताकि गांव के सामाजिक, सांस्कृतिक और सार्वजनिक कार्यों के लिए उसका उपयोग किया जा सके. लेकिन स्वीकृत विकास कार्य शुरू होने से पहले ही एक व्यक्ति ने उक्त भूमि पर अवैध कब्जा कर वहां शराब व अन्य नशे के अवैध कारोबार का अड्डा बना लिया. हैरानी की बात यह है कि संबंधित व्यक्ति का पक्का निजी मकान ठीक सामने स्थित है, इसके बावजूद उसने जानबूझकर शासकीय भूमि पर कब्जा कर रखा है और वहीं से नशे का धंधा चला रहा है. इससे यह सवाल उठना लाज़िमी है कि आखिर ऐसे अवैध कब्जों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही.इस अवैध गतिविधि का सीधा असर गांव के माहौल पर पड़ रहा है. मंदिर परिसर के आसपास असामाजिक तत्वों की आवाजाही बढ़ गई है, जिससे न केवल ग्रामीणों में असुरक्षा का माहौल है, बल्कि धार्मिक स्थल की पवित्रता और गरिमा भी लगातार प्रभावित हो रही है।
सरपंच ने एसडीएम को सैंपी शिकायत
मामले को लेकर ग्राम पंचायत सरपंच कौशल पाठक ने हनुमान एसडीएम को लिखित शिकायत सौंपते हुए अवैध अतिक्रमण हटाने और नशे के कारोबार पर तत्काल रोक लगाने की मांग की थी. बावजूद इसके, शिकायत के कई दिनों बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है. अब गांव में यह सवाल चर्चा का विषय बन चुका है कि जब सरपंच की शिकायत भी प्रशासनिक फाइलों में दबकर रह जाती है, तो आम ग्रामीण अपनी फरियाद किससे कहें. ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव-गांव इसी तरह शराब और नशा बिकता रहा, तो युवा पीढ़ी का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
ग्रामीणों ने की प्रशासन से मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि शासकीय भूमि से अवैध कब्जा तत्काल हटाया जाए, नशे के अवैध कारोबार पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, और मंदिर परिसर की पवित्रता एवं सुरक्षा सुनिश्चित की जाए. अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में केवल काग़ज़ी कार्यवाही तक सीमित रहता है, या ज़मीनी स्तर पर ठोस कदम उठाकर गांव के विश्वास को बहाल करता है।

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