ईरान-अमेरिका तनाव पर बोला कतर- परिणाम बेहद विनाशकारी होंगे
दोहा। ईरान में जारी आंतरिक विद्रोह और प्रदर्शनकारियों पर हो रही हिंसक कार्रवाई ने खाड़ी देशों में युद्ध की आहट तेज कर दी है। ईरान में मौतों का आंकड़ा 2,000 के पार पहुंचने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आक्रामक रुख ने पूरे क्षेत्र में चिंता पैदा कर दी है। इस गंभीर संकट पर पहली बार किसी मुस्लिम देश ने खुलकर अपनी राय रखी है। कतर ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव बढ़ता है, तो इसके नतीजे पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी होंगे।
दोहा में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल-अंसारी ने वैश्विक समुदाय को आगाह किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा ईरान पर संभावित हवाई हमले की धमकियों के बाद स्थिति बेहद नाजुक हो गई है। कतर का मानना है कि सैन्य टकराव किसी भी समस्या का समाधान नहीं है और इससे न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया की स्थिरता को खतरा पैदा होगा। प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि कतर अभी भी कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं पर विश्वास करता है और दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता के लिए अपने सहयोगियों के साथ लगातार संपर्क में है। कतर की यह चिंता बेवजह नहीं है। जून 2025 में जब अमेरिका ने ईरानी परमाणु ठिकानों पर हमला किया था, तब ईरान ने जवाबी कार्रवाई में कतर स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे अल उदीद को निशाना बनाया था। उस समय भी कतर ने ही वाशिंगटन और तेहरान के बीच समझौता कराने में अहम भूमिका निभाई थी। वर्तमान में कतर के इसी अमेरिकी बेस पर बढ़ती हलचल ने इन कयासों को बल दिया है कि अमेरिका कभी भी ईरान के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है।
दूसरी ओर, ईरान के तेवर भी बेहद सख्त नजर आ रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा प्रदर्शनकारियों को संस्थाओं पर कब्जे के लिए उकसाने और अधिकारियों के साथ बैठकें रद्द करने के जवाब में ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबाफ ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा है कि यदि अमेरिका हस्तक्षेप करता है, तो अमेरिकी सेना और उनके जहाज ईरान के लिए वैध लक्ष्य होंगे। वहीं, मानवाधिकार संगठनों और विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार ईरान में स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही है, जहाँ मरने वालों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। हालाँकि, व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि कूटनीति का रास्ता अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन ट्रंप की मदद रास्ते में है वाली चेतावनी ने युद्ध की आशंका को बढ़ा दिया है।

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