Jayant Chaudhary के साथ मंच साझा, किसानों को साधने की नई रणनीति
मेरठ| के शताब्दीनगर में नमो भारत रैपिड और मेट्रो के शुभारंभ से लेकर जनसभा तक चौधराहट की राजनीति भी केंद्रित रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को पूरे कार्यक्रम में अपने साथ रखकर सियासी संदेश दिया। मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरणसिंह की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें भारत रत्न देने का सौभाग्य मिला है। प्रधानमंत्री के बयान और मंचीय संकेत ने पश्चिम उत्तर प्रदेश की सियासत में चर्चा का विषय बन गईं। 2027 के विधानसभा चुनाव में रालोद मुखिया जयंत चौधरी का क्या रूख रहेगा, इस पर कुछ कहना जल्दबाजी होगा। लेकिन मोदी ने स्पष्ट कर दिया कि चौधराहट की तवज्जो बरकरार है और रहेगी। जनसभा में रालोद कार्यकर्ताओं, किसानों और जाट नेताओं में उत्साह भी देखने को मिला। चौधरी चरण सिंह का नाम लेते ही सभा स्थल मोदी के नारों से गूंज उठा।
मंच से दिखी राजनीतिक केमिस्ट्री
रैपिड मेट्रो के शुभारंभ के दौरान प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के साथ जयंत चौधरी को प्रमुखता से अपने पास रखा। जनसभा में भी मोदी-योगी के ठीक बगल वाली कुर्सी जयंत चौधरी को दी गई, जिसे राजनीतिक जानकार विशेष संकेत के रूप में देख रहे हैं। मंच पर मौजूद सांसद अरुण गोविल, राज्यसभा सदस्य, विधायक और एमएलसी का नाम प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में नहीं लिया। जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी का उल्लेख विशेष रूप से किया।चौधरी जयंत को नहीं मिला बोलने का मौका समारोह में चौधरी जयंत सिंह ने पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी के साथ मंच साझा किया। हालांकि उन्हें बोलने का मौका नहीं मिला। इससे रालोद समर्थक मायूस रहे।
किसानों को दिया संदेश
मेरठ-हापुड़ क्षेत्र के विकास कार्यों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने चौधरी चरण सिंह को किसान हितैषी नेता बताया। उन्होंने कहा कि देश के किसानों के लिए उनके योगदान को सम्मान देते हुए भारत रत्न दिया गया। कहा जा रहा है कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में जाट, किसान मतदाताओं को साधने के लिए मोदी का यह रणनीतिक संदेश था।
पश्चिम यूपी की सियासत में हलचल
मेरठ की जनसभा ने साफ कर दिया कि पश्चिम उत्तर प्रदेश की राजनीति में किसान व जाट समीकरण अब भी निर्णायक भूमिका में हैं। प्रधानमंत्री द्वारा जयंत चौधरी को मंच पर तवज्जो और चौधरी चरण सिंह का बार-बार उल्लेख इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान जैसे ही चौधरी चरण सिंह का नाम आया, रालोद कार्यकर्ताओं और जाट नेताओं ने जोरदार नारेबाजी की। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद किसानों ने भी इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।

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