डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी, पत्नी तड़पती रही और पति बेबस
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी में 'डिजिटल अरेस्ट' का एक ऐसा खौफनाक मामला सामने आया है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। अरेरा कॉलोनी निवासी एक बुजुर्ग दंपत्ति को शिकार बनाकर साइबर ठगों ने न केवल उनसे 36 लाख रुपये की मोटी रकम ऐंठ ली, बल्कि इस दौरान दिखाई गई क्रूरता ने अमानवीयता की सारी हदें पार कर दीं। यह घटना ठगी के बढ़ते खतरों के साथ-साथ अपराधियों के पत्थर दिल होने की भी गवाही देती है।
डिजिटल अरेस्ट और ठगों की बेरहमी
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, ई-5 अरेरा कॉलोनी के रहने वाले अविनाश कक्कड़ (75), जो मंडीदीप की एक फैक्ट्री से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं, को ठगों ने फर्जी केस में फंसाने का डर दिखाकर डिजिटल अरेस्ट कर लिया था। जिस वक्त अविनाश ठगों के डिजिटल शिकंजे में थे, उसी दौरान उनकी पत्नी शशि कक्कड़ घर में काम करते हुए अचानक फिसल गईं। गिरने की वजह से उनके कूल्हे की हड्डी टूट गई और वे असहनीय दर्द से तड़पने लगीं।
दर्द से कराहती पत्नी और मजबूर पति
हादसे के बाद घायल महिला अपने पति से अस्पताल ले जाने की गुहार लगाती रही, लेकिन डिजिटल अरेस्ट का खौफ ऐसा था कि अविनाश चाहकर भी उनकी मदद नहीं कर सके। अविनाश ने कैमरे के सामने ठगों से हाथ जोड़कर कुछ देर की मोहलत मांगी ताकि वे अपनी पत्नी को डॉक्टर के पास ले जा सकें, लेकिन ठगों ने रत्ती भर भी रहम नहीं दिखाया। उन्होंने वृद्ध को एक मिनट के लिए भी स्क्रीन से हटने नहीं दिया और उन्हें लगातार धमकाते रहे।
बेटी-दामाद के आने पर खुला राज
काफी देर तक जब पत्नी का दर्द असहनीय हो गया, तो अविनाश ने हिम्मत जुटाकर अपने दामाद को फोन किया। सूचना मिलते ही उनकी बेटी और दामाद कोलार से तुरंत अरेरा कॉलोनी स्थित घर पहुंचे। उन्होंने देखा कि अविनाश कमरे में कैद होकर मोबाइल स्क्रीन के सामने डरे-सहमे बैठे हैं। बेटी-दामाद ने जब जबरन कमरे में प्रवेश किया, तब जाकर डिजिटल अरेस्ट का राज खुला। उन्होंने तुरंत एम्बुलेंस बुलाकर मां को अस्पताल पहुंचाया और साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए हबीबगंज पुलिस ने 'ई-जीरो एफआईआर' के माध्यम से प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस अब उन बैंक खातों और लोकेशन की जांच कर रही है, जहां 36 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। इस घटना ने एक बार फिर यह चेतावनी दी है कि कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस वीडियो कॉल के जरिए किसी को 'अरेस्ट' नहीं करती। यदि कोई आपको इस तरह डराता है, तो तुरंत अपने परिजनों को सूचित करें और साइबर पुलिस की मदद लें।

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