TMC को बड़ा झटका! सांसद काकोली घोष दस्तिदार का सभी पदों से इस्तीफा
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब पार्टी सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उस वक्त बहुत बड़ा झटका लगा, जब उनकी बेहद करीबी मानी जाने वाली वरिष्ठ नेता और बारासात से सांसद काकोली घोष ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया।
काकोली घोष लोकसभा में टीएमसी की चीफ व्हिप (Chief Whip) भी रह चुकी हैं। माना जा रहा है कि हाल ही में उन्हें इस पद से हटाकर कल्याण बनर्जी को जिम्मेदारी सौंपे जाने से वे काफी नाराज थीं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां करते हुए लिखा कि आज उन्हें चार दशकों की वफादारी का इनाम मिल गया है।
चुनावी रणनीति बनाने वाली टीम पर उठाए सवाल
काकोली घोष ने टीएमसी के बारासात जिला अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया है। अपने इस्तीफे में उन्होंने पार्टी की चुनावी रणनीति संभालने वाली 'आईपैक' (I-PAC) टीम के काम करने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी के अंदर का विवाद अब खुलकर सड़क पर आ गया है।
बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी की बैठक में पहुंचीं
बंगाल की राजनीति में खलबली तब और ज्यादा बढ़ गई, जब काकोली घोष टीएमसी के 6 अन्य विधायकों के साथ कल्याणी में हुई एक सरकारी बैठक में शामिल होने पहुंच गईं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस बैठक की अध्यक्षता पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी कर रहे थे। टीएमसी के विधायकों का बीजेपी नेता की बैठक में जाना कई नए राजनीतिक इशारे कर रहा है।
बीजेपी का बड़ा दावा: टीएमसी के 50 विधायक संपर्क में
इसी बीच बीजेपी ने टीएमसी की इस अंदरूनी लड़ाई को लेकर एक बहुत बड़ा दावा कर दिया है। बीजेपी सांसद सौमित्र खान ने कहा है कि टीएमसी के करीब 50 विधायक और 20 सांसद अपनी ही पार्टी से नाराज चल रहे हैं और वे बीजेपी में शामिल होना चाहते हैं। सौमित्र खान ने दावा किया कि अगर बीजेपी हाईकमान एक बार हरी झंडी दे दे, तो टीएमसी में बहुत बड़ी टूट हो जाएगी और पार्टी बिखर जाएगी।
क्या टीएमसी में होने वाली है बड़ी टूट?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव हारने के बाद से टीएमसी के अंदर संगठन और बड़े नेताओं को लेकर असंतोष बढ़ गया है। कई सीनियर नेता खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं और बीजेपी इसी मौके का फायदा उठाने की ताक में है। अब देखना यह होगा कि क्या काकोली घोष का इस्तीफा सिर्फ एक शुरुआत है या आने वाले दिनों में ममता बनर्जी की पार्टी में कोई बड़ा फेरबदल होने वाला है।

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