चिप निर्माण पर भारत का बड़ा दांव, EV से अंतरिक्ष तक दुनिया में बढ़ेगी ताकत
नई दिल्ली। भारत ने पिछले दो वर्षों के भीतर रेयर अर्थ (दुर्लभ पृथ्वी तत्वों), क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) और सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ी रणनीतिक छलांग लगाई है। सरकार द्वारा जारी आधिकारिक विवरण के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी विदेश और आर्थिक नीति के तहत भारत ने वैश्विक स्तर पर 35 देशों को एक मजबूत रणनीतिक तंत्र से जोड़ने का खाका तैयार किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत 24 देशों के साथ विभिन्न द्विपक्षीय समझौते, निवेश संधियां और रणनीतिक साझेदारियां पूरी की जा चुकी हैं, जबकि 11 अन्य खनिज संपन्न देशों के साथ उच्च स्तरीय वार्ता अंतिम दौर में है। इस अभूतपूर्व कूटनीति का मुख्य उद्देश्य घरेलू स्तर पर औद्योगिक आवश्यकताओं, हरित ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) विनिर्माण, उन्नत बैटरी निर्माण, रक्षा उपकरण, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर उद्योगों के लिए कच्चे माल की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
महाद्वीपों के पार भारत का रणनीतिक नेटवर्क और व्यापक कूटनीति
केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए एक विशेष मानचित्र और ग्राफिक डेटा के अनुसार, भारत ने किसी एक क्षेत्र पर अपनी निर्भरता खत्म करने के लिए उत्तरी अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, पश्चिम एशिया, मध्य एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप तक अपनी पहुंच का विस्तार किया है। भारत की यह नई भू-राजनीतिक रणनीति महज दूसरे देशों से खनिज आयात करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तहत संयुक्त अन्वेषण (खोज), आधुनिक खनन, कच्चे माल की प्रोसेसिंग, तकनीकी हस्तांतरण, बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश और एक सुरक्षित तथा भरोसेमंद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) का निर्माण करना भी शामिल है, ताकि वैश्विक संकटों के समय भी भारतीय उद्योगों को झटका न लगे।
वैश्विक महाशक्तियों और खनिज संपन्न देशों के साथ महत्वपूर्ण समझौते
अपनी खनिज सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए भारत ने दुनिया की प्रमुख महाशक्तियों और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देशों के साथ अलग-अलग स्तरों पर हाथ मिलाया है। इस वैश्विक नेटवर्क के तहत भारत ने संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, इटली, नीदरलैंड, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसी तकनीकी रूप से उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के साथ विशेष गठबंधन किए हैं। इसके साथ ही, लैटिन अमेरिका और अफ्रीकी महाद्वीप के खनिज संपन्न देशों जैसे ब्राजील, अर्जेंटीना, लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (डीआर कांगो), घाना, नामीबिया, मोजाम्बिक, जिम्बाब्वे और मलावी के साथ भी माइनिंग ब्लॉक और शोधन तकनीकों को लेकर समझौते किए गए हैं।
पश्चिम एशिया से लेकर रूस तक द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार
रणनीतिक साझेदारियों की इस फेहरिस्त में पश्चिम एशिया के प्रमुख देशों सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इजरायल को भी शामिल किया गया है, जो भारत के आर्थिक गलियारे का अहम हिस्सा हैं। इसके अतिरिक्त दक्षिण-पूर्व एशिया के उभरते बाजार वियतनाम और सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण सहयोगी देश रूस के साथ भी अलग-अलग क्षेत्रों में तकनीकी और व्यापारिक तालमेल स्थापित किया गया है। इन विविध और व्यापक समझौतों के माध्यम से भारत आने वाले दशकों के लिए अपनी तकनीकी और औद्योगिक क्रांति की बुनियाद को पूरी तरह सुरक्षित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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