जबलपुर समेत 16 जिलों में डीए एरियर भुगतान अटका, सामने आई बड़ी वजह
जबलपुर। मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग में प्रशासनिक सुस्ती और घोर लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सूबे के हजारों कॉलेज कर्मचारियों और प्राध्यापकों की आर्थिक कमर तोड़ दी है। राज्य के जबलपुर सहित कुल 16 महत्वपूर्ण जिलों के अशासकीय और अनुदादित महाविद्यालयों में जून 2026 के मासिक वेतन और महंगाई भत्ते (DA) के एरियर का भुगतान पूरी तरह से अटक गया है। इस गंभीर संकट की मुख्य वजह इन जिलों के संबंधित शिक्षा अधिकारियों और कॉलेज प्रबंधन द्वारा उच्च शिक्षा विभाग द्वारा मांगी गई आवश्यक वित्तीय जानकारी को समय पर न भेजना है। तय समय सीमा बीत जाने के बाद विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए लापरवाही बरतने वाले इन 16 जिलों के कॉलेजों को बजट आवंटन की चालू प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर (होल्ड) कर दिया है। इसके चलते अब इन शिक्षण संस्थानों के स्टाफ को अपनी गाढ़ी कमाई के पैसों के लिए कुछ और दिनों तक लंबा और मानसिक रूप से परेशान करने वाला इंतजार करना होगा।
इन 16 जिलों के अधिकारियों की लापरवाही से फंसा बजट: देखें पूरी सूची
उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी की गई आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, जिन जिलों के अधिकारियों ने वित्तीय डेटा भेजने में गंभीर सुस्ती दिखाई है, उनमें प्रदेश के कई बड़े शैक्षणिक हब शामिल हैं। इस सूची में मुख्य रूप से जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, इंदौर, नेपानगर, मंदसौर, उज्जैन, भिंड, मुरैना, अशोकनगर, हरदा, होशंगाबाद, विदिशा, रीवा और सागर शामिल हैं। विभाग की ओर से स्पष्ट और कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए थे कि सभी कॉलेज 8 जून तक निर्धारित डिजिटल प्रारूप में अपने कर्मचारियों का पूरा विवरण और एरियर की मांग जमा कर दें। इस संबंध में मुख्यालय से बार-बार रिमाइंडर और चेतावनी पत्र भी भेजे गए, लेकिन इन 16 जिलों के जिम्मेदार कप्तानों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। इसका सीधा खमियाजा अब उन बेकसूर कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है, जिनका घर पूरी तरह से इसी मासिक वेतन पर निर्भर है।
समय पर जानकारी देने वाले कॉलेजों को मिला 24.92 लाख से अधिक का अनुदान
इस पूरे मामले में वित्तीय अनुशासन का परिचय देते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने उन सभी अशासकीय और अनुदान प्राप्त महाविद्यालयों के लिए 24 लाख 92 हजार रुपये से अधिक की राशि का आवंटन तुरंत जारी कर दिया है, जिन्होंने समय रहते अपनी सारी कागजी और तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी कर ली थीं। विभाग ने इस संबंध में 2 जून को ही एक विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी थी ताकि जून के पहले या दूसरे हफ्ते में सभी के खातों में पैसे ट्रांसफर किए जा सकें।
दूसरी ओर, जबलपुर सहित अन्य प्रभावित जिलों के स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि विभाग के नियमों के अनुसार ही अनुदादित कॉलेजों से डेटा कलेक्ट किया जा रहा था। कुछ गिने-चुने कॉलेजों द्वारा अपने स्तर पर देरी करने की वजह से पूरे जिले का डेटा समय पर कंपाइल नहीं हो सका, जिससे यह गतिरोध पैदा हुआ। अधिकारियों ने दावा किया है कि अब सभी चूके हुए कॉलेजों से युद्ध स्तर पर रिकॉर्ड हासिल किए जा रहे हैं और जल्द ही इसे भोपाल मुख्यालय भेजकर प्रक्रिया को दोबारा शुरू कराया जाएगा।
विभागीय सख्ती से मची बेचैनी, बिना एकीकृत डेटा के नहीं जारी होगा एक भी रुपया
मुख्यालय की इस अप्रत्याशित और सख्त कार्रवाई के बाद संबंधित जिलों के उच्च शिक्षा अधिकारियों और कॉलेज प्राचार्यों के दफ्तरों में भारी बेचैनी और हड़कंप का माहौल है। प्राध्यापक संगठनों ने भी इस पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे सीधे तौर पर कर्मचारियों के अधिकारों का हनन बताया है।
हालांकि, उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपना रुख पूरी तरह साफ कर दिया है कि जब तक इन डिफॉल्टर जिलों से एकमुश्त एकीकृत मांग (कंसोलिडेटेड डिमांड) और सही प्रारूप में शत-प्रतिशत त्रुटिहीन डेटा प्राप्त नहीं हो जाता, तब तक किसी भी परिस्थिति में वित्तीय आवंटन को मंजूरी नहीं दी जाएगी। विभाग का कहना है कि वे पूरी तरह से वित्तीय नियमों के दायरे में रहकर ही सरकारी खजाने से राशि का वितरण करेंगे। इस पूरे प्रशासनिक चक्रव्यूह ने कॉलेज कर्मचारियों के सामने इस महीने के घरेलू खर्चों, बच्चों की स्कूल फीस और लोन की ईएमआई (EMI) चुकाने का एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। फिलहाल, विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे घटनाक्रम और डेटा रिकवरी की मॉनिटरिंग कर रहे हैं ताकि भविष्य में इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना कार्यप्रणाली पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके।

अनशन खत्म करने से पहले सोनम वांगचुक की सरकार से बड़ी मांग, पत्र लिखकर रखी शर्त
सीमा राजभर पर बलिया में मुकदमा दर्ज, सपा की महिला विंग की राष्ट्रीय अध्यक्ष पर कार्रवाई
शिवसेना विवाद: उद्धव गुट की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट तैयार, बागी सांसदों और लोकसभा सचिवालय को नोटिस
क्वाड बैठक में जयशंकर का बड़ा बयान, स्वतंत्र और समावेशी हिंद-प्रशांत पर दिया जोर
सावधान! मध्य प्रदेश में 'चड्डी-बनियान गैंग' की दस्तक, पुलिस ने जारी की चेतावनी
पेपर लीक को लेकर राहुल गांधी का बड़ा आरोप, बोले- 10 साल में 152 मामले, लेकिन कार्रवाई नहीं
भोजशाला मामले में नया मोड़, नमाज स्थल को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा विवाद
अवैध निर्माण पर सख्ती, निगम ने 50+ बिल्डिंग नक्शे जांच के दायरे में लिए