UP Election 2027: चंद्रशेखर-स्वामी प्रसाद मौर्य की गुप्त मुलाकात, किस दल की बढ़ेगी टेंशन?
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की सियासी तैयारियां अभी से जोर पकड़ने लगी हैं। नगीना सीट से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के मुखिया चंद्रशेखर आजाद और राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य के बीच हाल ही में एक अहम बैठक हुई है। इस मुलाकात के बाद राज्य के राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। माना जा रहा है कि दोनों नेता मिलकर चुनाव के लिए एक नया मोर्चा तैयार कर सकते हैं, जिससे राज्य का मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना बढ़ गई है।
नेताओं का जनाधार और जातीय समीकरण
इस गठबंधन के संभावित असर को समझने के लिए दोनों नेताओं के सामाजिक प्रभाव को देखना जरूरी है। स्वामी प्रसाद मौर्य ओबीसी वर्ग की मौर्य, कुशवाहा, शाक्य और सैनी जातियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिनकी आबादी राज्य में करीब 6 से 7 प्रतिशत है। यह वोट बैंक पूर्वांचल और मध्य यूपी की कई सीटों पर जीत-हार तय करता है। वहीं चंद्रशेखर आजाद दलित समुदाय के जाटव समाज से आते हैं, जिसकी हिस्सेदारी करीब 11 से 12 फीसदी है। मायावती के कमजोर पड़ने के बाद चंद्रशेखर तेजी से दलित युवाओं के बीच अपनी पहचान बना रहे हैं।
मुलाकात के सियासी मायने और असर
दोनों नेताओं की इस जुगलबंदी को राज्य की राजनीति में एक नए समीकरण के तौर पर देखा जा रहा है। स्वामी प्रसाद मौर्य भले ही पिछला चुनाव हार गए हों, लेकिन वे अपनी बिरादरी के बड़े नेता माने जाते हैं। दूसरी तरफ चंद्रशेखर आजाद ने नगीना लोकसभा सीट पर बड़ी जीत दर्ज कर यह साबित कर दिया है कि उनके पास एक वफादार वोट बैंक है। यदि ये दोनों ताकतें एक साथ आती हैं, तो यह नया गठबंधन अन्य बड़े राजनीतिक दलों के समीकरणों को बिगाड़ सकता है।
भविष्य की त्रिकोणीय जंग की राह
यदि यह नया मोर्चा हकीकत में बदलता है, तो उत्तर प्रदेश का चुनाव सिर्फ दो बड़े धड़ों के बीच सीमित नहीं रहेगा। अब तक की सीधी लड़ाई को यह गठबंधन तीसरे कोण की तरफ ले जा सकता है। पश्चिमी यूपी से लेकर पूर्वांचल तक फैले इन दोनों नेताओं के प्रभाव के कारण आने वाले समय में सूबे की चुनावी बिसात और भी दिलचस्प होने की उम्मीद है।

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