क्या आप भी स्लिम-ट्रिम होने के लिए फॉलो करते हैं केटोजेनिक डाइट....
इन दिनों लोग अपनी फिटनेस को लेकर काफी सजग और सतर्क हो चुके हैं। बदलती लाइफस्टाइल की वजह से लोग भले ही मोटापे और बढ़ते वजन का शिकार हो रहे हैं, लेकिन साथ ही लोग अपने वजन को कंंट्रोल करने के लिए कई तरीके भी अपना रहे हैं। वेट लॉस के लिए कई तरह की डाइट लोगों के बीच लोकप्रिय हैं। केटोजेनिक डाइट इन्हीं में से एक है, जिसमें फैट और प्रोटीन ज्यादा और कार्बोहाइड्रेट कम होता है।
ज्यादातर लोग वेट लॉस करने और इससे होने वाले अन्य स्वास्थ्य लाभों की वजह से इसे अपनी रूटीन का हिस्सा बनाते हैं। हालांकि, हाल ही में इसे लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इसके मुताबिक कीटो डाइट स्वस्थ आहार के मानकों को पूरा नहीं करती है और हार्ट डिजीज वाले कुछ लोगों के लिए सुरक्षित नहीं है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं-
क्या कहती है स्टडी?
साइंस डारेक्ट जर्नल में पब्लिश कार्डियोलॉजी में वर्तमान समस्याएं के एक रिव्यू में बताया गया है कि कैसे कीटो डाइट हार्ट डिजीज के खतरे को बढ़ा सकती है। रिव्यू के मुताबिक केटोजेनिक डाइट खून में ट्राइग्लिसराइड्स के लेवल को कम करता है, लेकिन धमनियों (आर्टरीज) को ब्लॉक करने वाले एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाता है, जिससे हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ता है।
शरीर में पोषक तत्वों की कमी
रिव्यू में यह भी पता चला कि साथ ही इस डाइट को फॉलो करने के लिए लोग कार्बोहाइड्रेट न खाने की वजह से ज्यादातर सब्जियों और फलों से दूर हो जाते हैं, जिससे शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। साथ ही इस डाइट में लोग ज्यादा मात्रा पत्तेदार साग का सेवन कर सकते हैं, जिसमें मौजूद विटामिन कुछ हार्ट डिजीज के मरीजों द्वारा ली जाने वाली एंटी-क्लॉटिंग दवा वारफारिन में हस्तक्षेप कर सकता है।
क्या है कीटोजेनिक डाइट
कीटोजेनिक डाइट एक ऐसी डाइट हैं, जिसमें बहुत कम मात्रा में कार्बोहाइड्रेट का सेवन किया जाता है और उन्हें फैट से रिप्लेस किया जाता है, ताकि आपके शरीर को ऊर्जा के लिए फैट बर्न करने में मदद मिल सके। बात करें इसके फायदों की, तो यहवजन कम करने और कुछ बीमारियों के जोखिम को कम करने में मददगार है।

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