मनोज बाजपेयी का बड़ा बयान, बोले- खराब फिल्मों की भी हो रही है तारीफ
जाने-माने अभिनेता मनोज बाजपेयी ने हाल ही में फिल्म उद्योग के बदलते माहौल, कृत्रिम रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जाने वाले फिल्म समीक्षणों (पेड रिव्यू) और कलाकारों के साथ रहने वाले बड़े लाम-लश्कर पर खुलकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि वे स्वयं अपनी फिल्मों के प्रचार-प्रसार के लिए किस तरह की सादगीपूर्ण और अनुशासित कार्यप्रणाली अपनाते हैं।
पेड रिव्यू और दिखावे के माहौल पर बेबाक राय
मनोज बाजपेयी ने खराब फिल्मों को भी जबरन सोशल मीडिया और विज्ञापनों के जरिए बेहतरीन साबित करने की प्रवृत्ति पर कड़ा प्रहार किया। उनका कहना है कि आजकल किसी भी कमजोर फिल्म को सफल दिखाने के लिए अभिनेताओं की पूरी पीआर टीम सक्रिय हो जाती है और कलाकारों के अभिनय की झूठी तारीफों के पुल बांधने लगती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे जिस श्रेणी के सिनेमा से जुड़े हैं, वहां इस तरह के दिखावे का कोई स्थान नहीं होता। अभिनेता ने यह भी साफ किया कि वे अपने करियर और फिल्मों से जुड़े तमाम निर्णय स्वयं लेते हैं, न कि किसी टीम के भरोसे छोड़ते हैं।
सेट पर कड़ा अनुशासन और सादगीपूर्ण कार्यशैली
अक्सर देखा जाता है कि बड़े सितारों के साथ सेट पर सहायकों की एक लंबी फौज होती है, लेकिन मनोज बाजपेयी अपनी निजी टीम को शूटिंग के मुख्य दायरे से दूर रखना पसंद करते हैं। उनका मानना है कि अभिनय एक बेहद संवेदनशील काम है, जिसमें केवल निर्देशक, साथी कलाकार और कैमरा टीम की ही सक्रिय मौजूदगी होनी चाहिए। वे आवश्यकता पड़ने पर ही अपने मेकअप मैन या सहायक को बुलाते हैं। उन्होंने साझा किया कि वे कई बार फिल्मों की शूटिंग के लिए अपने साथ हेयर स्टाइलिस्ट तक को नहीं ले जाते और कहानी की मांग के अनुसार बिना किसी अतिरिक्त साज-सज्जा के स्वाभाविक रूप से कैमरे के सामने आते हैं।
बजट की समझ और फिल्म प्रचार का वास्तविक नजरिया
मनोज ने कहा कि वे मुख्य रूप से लघु और मध्यम बजट की फिल्मों का हिस्सा रहे हैं, इसलिए वे फिजूलखर्ची और संसाधनों के दुरुपयोग के सख्त खिलाफ हैं। उनका मानना है कि बड़ी फिल्मों के निर्माताओं को यदि भारी-भरकम सपोर्ट सिस्टम से कोई आपत्ति नहीं है, तो उन्हें बाद में बजट बढ़ने की शिकायत भी नहीं करनी चाहिए। फिल्मों के प्रचार को लेकर उनका नजरिया बिल्कुल स्पष्ट है कि प्रमोशन केवल दर्शकों को जागरूक करने के लिए होना चाहिए, न कि हवा-हवाई माहौल बनाने के लिए। वे अपनी पूरी ईमानदारी से काम करने के बाद परिणाम को नियति पर छोड़ देते हैं और तुरंत अपनी अगली परियोजना की ओर बढ़ जाते हैं।

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