प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से बदली जयराम देवांगन की किस्मत
रायपुर : आदिवासी बहुल कोंडागांव जिले के विकासखंड कोंडागांव के ग्राम जरेबेंदरी निवासी कृषक जयराम देवांगन ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का लाभ लेकर मछली पालन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इस योजना के माध्यम से उन्होंने अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि करते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।
पूर्व में जयराम देवांगन पारंपरिक रूप से धान एवं मक्का की खेती करते थे, जिससे उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 1 लाख 10 हजार रुपये की आय ही प्राप्त होती थी। सीमित आय के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति में विशेष सुधार नहीं हो पा रहा था। वर्ष 2022-23 में उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत अपनी 1.40 हेक्टेयर भूमि में तालाब निर्माण का निर्णय लिया। इसके लिए लगभग 15.40 लाख रुपये की लागत से तालाब का निर्माण कराया गया, जिसमें शासन की ओर से उन्हें 6.16 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। तालाब निर्माण के बाद उन्होंने आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए मछली पालन के साथ-साथ मत्स्य बीज उत्पादन का कार्य प्रारंभ किया।
नई तकनीकों और मेहनत के परिणामस्वरूप उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जहां पहले उन्हें खेती से लगभग 1 लाख रुपये की वार्षिक आय प्राप्त होती थी, वहीं अब मछली पालन के माध्यम से उन्हें लगभग 7 लाख रुपये की आय प्राप्त हो रही है, जो पहले की तुलना मंन लगभग छह गुना अधिक है। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और आज वे आत्मनिर्भर बनकर अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बने हैं।
कृषक जयराम देवांगन ने शासन की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना तथा जिला प्रशासन और मत्स्य विभाग के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि शासन की इस योजना से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है और वे भविष्य में इस कार्य को और विस्तार देने की योजना बना रहे हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधार पर जोर, राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में अहम निर्देश
“नक्सल प्रभाव से विकास की ओर बढ़ता ग्राम हेटारकसा
मथुरा में बड़ा हादसा, यमुना नदी में नाव डूबी, 6 से ज्यादा की मौत
LPG संकट: कर्नाटक ने केंद्र से ऑटो गैस सप्लाई की समस्या दूर करने की अपील की
क्या है अमित शाह का ‘ट्रिपल D’ फॉर्मूला? बंगाल में घुसपैठ पर सख्ती का प्लान
छतरपुर में ग्रामीणों का विरोध, केन-बेतवा लिंक परियोजना पर उठे सवाल