सिंगूर में बदले सुर, कभी जीत दिलाने वाला इलाका अब दिखा नाराज
सिंगूर/हुगली | पश्चिम बंगाल की राजनीति का 'महातीर्थ' माना जाने वाला सिंगूर आज एक अजीब सी चुप्पी ओढ़े हुए है। यह वही जमीन है जहाँ से 2011 में ममता बनर्जी ने 34 साल पुराने वामपंथी किले को ढहाने की पटकथा लिखी थी। टाटा नैनो के खिलाफ हुए आंदोलन ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) को सत्ता के शिखर तक पहुँचाया, लेकिन आज 15 साल बाद यहाँ का मतदाता मुखर नहीं है। चुनावी शोर के बीच यहाँ एक 'खतरनाक सन्नाटा' पसरा है।
आलू के दाम और 'कट मनी': चुनावी चर्चा के नए केंद्र
सिंगूर के बाजारों में इस बार राजनीति से ज्यादा चर्चा रोजी-रोटी की है।
-
किसान की व्यथा: आलू मंडी के व्यापारी अंतु दास बताते हैं कि लागत निकालना दूभर हो गया है। 50 किलो की बोरी 2700 रुपए में बिक रही है, जो किसानों की कमर तोड़ रही है।
-
कमीशन का खेल: रतनपुर के चाय अड्डों पर 'कट मनी' और 'कमीशन' जैसे शब्द आम हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि घर बनाने से लेकर सरकारी काम तक के लिए 'खास' लोगों से ही मटीरियल लेना पड़ता है और हर कदम पर कमीशन देना होता है।
आंदोलन की विरासत: बंजर जमीन और पलायन की मजबूरी
टाटा मोटर्स के प्लांट के लिए अधिग्रहित 997 एकड़ जमीन 2016 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर किसानों को मिल तो गई, लेकिन वह खुशी अब फीकी पड़ चुकी है।
-
खेती लायक नहीं रही जमीन: युवाओं का कहना है कि फैक्ट्ररी के लिए डाली गई कंक्रीट की परत ने उपजाऊ मिट्टी को बंजर बना दिया है।
-
बेरोजगारी का दंश: वॉलीबॉल खेल रहे स्थानीय युवा राजू दास कहते हैं, "दुनिया हमें जानती है, लेकिन हमने आंदोलन की भारी कीमत चुकाई है। डिग्री है पर नौकरी नहीं, इसलिए पलायन ही एकमात्र रास्ता है।"
सियासी दांव-पेंच: हुगली की 18 सीटों पर असर
सिंगूर का मूड पूरे हुगली जिले की 18 सीटों का भविष्य तय करता है।
-
मौजूदा स्थिति: 2021 के नतीजों में यहाँ 14 सीटें TMC और 4 भाजपा के पास थीं।
-
रणनीति: एंटी-इंकमबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) को भांपते हुए तृणमूल ने अपने 10 मौजूदा विधायकों के टिकट काट दिए हैं। मुकाबला सीधा TMC बनाम भाजपा के बीच है।
एक विरोधाभास: उद्योग का इंतजार
विडंबना देखिए, जिन लोगों ने 17 साल पहले टाटा को यहाँ से खदेड़ने के लिए जान लगा दी थी, आज वही लोग औद्योगिक विकास की राह तक रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दोनों ने रैलियां तो कीं, लेकिन 'इंडस्ट्री' को लेकर कोई भी ठोस रोडमैप पेश करने में हिचक रहा है।
सिंगूर की हकीकत:
-
2008: टाटा ने प्रोजेक्ट हटाने का ऐलान किया।
-
2011: सिंगूर लहर ने ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री बनाया।
-
2026: अब वही सिंगूर बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और कृषि संकट के सवालों से घिरा है।
सिंगूर की यह खामोशी 4 मई को आने वाले नतीजों में किसी बड़े उलटफेर का संकेत दे रही है या फिर यह 'दीदी' पर भरोसे की निरंतरता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

फास्ट-ट्रैक कोर्ट पर अमित शाह का समर्थन, आंदोलन को लेकर विपक्ष को दी नसीहत
पहले टी20 से पहले कप्तान श्रेयस अय्यर का बड़ा मंत्र, खिलाड़ियों से कहा- बेखौफ खेलो
भारत से मुकाबले से पहले जिम्बाब्वे ने बदली टीम, आखिरी वक्त पर लिया बड़ा फैसला
मध्यप्रदेश को मिलेगी नई पहचान, ग्वालियर में आकार लेगा पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन
शेयर बाजार में कमाई का मौका! इन 5 स्टॉक्स पर मोतीलाल ओसवाल ने जताया भरोसा
NEET विवाद पर नितिन नवीन का बड़ा बयान, बोले- विपक्ष के हर सवाल का देंगे जवाब
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर फूटा लोगों का गुस्सा, शताब्दीपुरम पुलिस छावनी में तब्दील
'ड्रग्स केस में फंसा दूंगा' कहने वाले पुलिसकर्मी पर गिरी गाज, किया गया सस्पेंड
कैंची से घायल बच्चे की जान पर बनी आफत, डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी से बचाया
ऑटोइम्यून बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकती है आंखों और मुंह की ड्राइनेस, जानें बचाव के तरीके