बालाजी मंदिर से जुड़ी ये मान्यताएं
भारत के ऐतिहासिक और सबसे अमीर मंदिरों में से एक है तिरुपति बालाजी मंदिर है। तिरुपति महाराज जी के दरबार में देश-विदेश के भक्तों की भीड़ रहती है। यहां अमीर और गरीब दोनों जाते हैं। हर साल लाखों लोग तिरुमाला की पहाडिय़ों पर उनके दर्शन करने आते हैं। तिरुपति के इतने प्रचलित होने के पीछे कई कथाएं और मान्यताएं हैं। इस मंदिर से बहुत सारी मान्यताएं जुड़ी हैं।
माना जाता है कि तिरुपति बालाजी अपनी पत्नी पद्मावती के साथ तिरुमला में रहते हैं।
तिरुपति बालाजी मंदिर के मुख्य दरवाजे के दाईं ओर एक छड़ी है। कहा जाता है कि इसी छड़ी से बालाजी की बाल रूप में पिटाई हुई थी, जिसके चलते उनकी ठोड़ी पर चोट आई थी।
मान्यता है कि बालरूप में एक बार बालाजी को ठोड़ी से रक्त आया था। इसके बाद से ही बालाजी की प्रतिमा की ठोड़ी पर चंदन लगाने का चलन शुरू हुआ।
कहते हैं कि बालाजी के सिर रेशमी बाल हैं और उनके रेशमी बाल कभी उलझते नहीं।
कहते हैं कि तिरुपति बालाजी मंदिर से करीब करीब 23 किलोमीटर दूर एक से लाए गए फूल भगवान को चढ़ाए जाते हैं। इतना ही नहीं वहीं से भगवान को चढ़ाई जाने वाली दूसरी वस्तुएं भी आती हैं।
हैरानी की बात तो यह है कि वास्तव में बालाजी महाराज मंदिर में दाएं कोने में विराजमान हैं, लेकिन उन्हें देख कर ऐसा लगता है मानों वे गर्भगृह के मध्य भाग में हों।
तिरुपति बालाजी मंदिर में बालाजी महाराज को रोजाना धोती और साड़ी से सजाया जाता है।
कहते हैं कि बालाजी महाराज की मूर्ती की पीठ पर कान लगाकर सुनने से समुद्र घोष सुनाई देता है और उनकी पीठ को चाहे जितनी बार भी क्यों न साफ कर लिया जाए वहां बार बार गीलापन आ जाता है।

अफगान बलों का पाकिस्तान के खिलाफ जवाबी हमला, 17 आर्मी पोस्ट पर कब्जा किया, 40 सैनिक मारने का दावा
पीएम मोदी इजराइल का दौरा समाप्त कर वापस लौटे, FTA पर जल्द होगी घोषणा
होली पर बना खास राजयोग, इन राशियों की बदलेगी तकदीर
उड़नखटोले पर विदा हुई पापा की परी, सतना में पिता ने पूरा किया बेटी का ख्वाब
पहली होली मायके में ही क्यों? जानिए शादी के बाद की खास परंपरा
भारतीय विवाह में हल्दी-तेल की रस्म क्यों मानी जाती है शुभ? जानिए रहस्य
आज का अंक ज्योतिष: 3, 5 और 9 मूलांक वालों की होगी चांदी
मौन की शक्ति: श्री श्री रवि शंकर ने बताया चिंता से मुक्ति का अनोखा तरीका
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (27 फ़रवरी 2026)
गोंदिया–जबलपुर रेल लाइन दोहरीकरण को मिली मंजूरी, महाकौशल को बड़ी सौगात