UPATS Alert: प्रिंटिंग प्रेस के जरिए आंतक का प्रचार, विदेशी फंडिंग का पर्दाफाश
यूपी | दिल्ली ब्लास्ट मामले में एक तरह जहां यूपी में आतंकी डॉक्टरों के बडे नेटवर्क का खुलासा हुआ है वहीं ग्रेटर नोएडा में प्रिंटिंग प्रेस की आड़ में आतंक का प्रचार करने वाली फैक्ट्री का पर्दाफाश हुआ है. आतंक के प्रचार के लिए विदेशों से करोड़ों की फंडिंग की भी बात सामने आई है |
यूपी एटीएस ने मंगलवार को ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र - 5 में चल रही इस्तांबुल इंटरनेशनल में प्रिंटिंग प्रेसल पर छापा मारा. यूपीएटीएस (UPATS) को जानकारी मिली थी कि प्रिंटिंग प्रेस में भड़काऊ सामग्री प्रकाशित की जाती है और उसके लिए विदेशों से करोड़ों रुपये की फंडिंग की जाती है |
UPATS ने इस्तांबुल इंटरनेशनल में प्रिंटिंग प्रेस में छापा मारकर करीब 2 घंटे तक यहां दस्तावेज खंगाले और कंपनी के कर्मचारियों से पूछताछ की. इतना ही नहीं टीम ने कंपनी के CCTV कैमरों की फुटेज को भी अपने कब्जे में ले लिया |
टेरर फंडिंग और बांग्लादेशी घुसपैठियों को पनाह देने का आरोप
जानकारी के मुताबिक इस्तांबुल इंटरनेशनल में प्रिंटिंग प्रेस कंपनी पर भड़काऊ किताबें छापने का आरोप है और विदेश से 11 करोड़ रुपये की फंडिंग भी सामने आई है|
पकड़ा गया 'रॉ' का फर्जी अफसर
यूपी एसटीएफ की नोएडा यूनिट ने खुद को रॉ का अधिकारी बताकर लोगों को गुमराह करने वाले एक युवक को गिरफ्तार किया है. आरोपी की पहचान सुनीत कुमार निवासी अजोई, थाना भगवानपुर, वैशाली (बिहार) के रूप में हुई है.एसटीएफ को काफी दिनों से सूचना मिल रही थी कि एक व्यक्ति फर्जी आईडी और सरकारी दस्तावेजों के सहारे विभिन्न लोगों से संपर्क कर ठगी की कोशिश कर रहा है |
फर्जी अफसर से मिले संदिग्ध दस्तावेज
मंगलवार को टीम ने तकनीकी निगरानी और मुखबिर की सूचना पर आरोपी को दबोच लिया. तलाशी लेने पर उसके पास से बड़ी मात्रा में संदिग्ध और फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए. इनमें दो आधार कार्ड, तीन वोटर आईडी कार्ड, दो फर्जी पहचान पत्र, पांच पैन कार्ड, 20 अलग-अलग बैंकों की चेकबुक और आठ डेबिट–क्रेडिट कार्ड शामिल हैं. इसके अलावा 17 अलग-अलग नामों में किए गए एग्रीमेंट और विभिन्न राज्यों के कई मतदाता पहचान पत्र भी मिले हैं |
एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार आरोपी इन दस्तावेजों की मदद से खुद को केंद्रीय एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों पर दबाव बनाता था और विश्वास हासिल करता था. दस्तावेजों की प्राथमिक जांच में कई पहचान पत्रों के फर्जी होने की पुष्टि हुई है. पूछताछ में सुनीत कुमार ने स्वीकार किया कि वह फर्जी पहचान का इस्तेमाल विभिन्न वित्तीय लाभ लेने और लोगों को भ्रमित करने के लिए करता था |
एसटीएफ ने आरोपी के खिलाफ आवश्यक धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है. टीम यह भी पता लगा रही है कि आरोपी के पीछे कोई बड़ा गिरोह तो सक्रिय नहीं है |

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