Jammu and Kashmir में चुनावी प्रक्रिया को लेकर हलचल तेज
जम्मू: जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से प्रतीक्षित पंचायत और नगर निकाय चुनावों का बिगुल श्री अमरनाथ यात्रा संपन्न होने के बाद किसी भी समय फूंक जा सकता है। प्रदेश चुनाव आयोग (SEC) ने इन चुनावों को लेकर अपनी प्रशासनिक तैयारियां काफी तेज कर दी हैं। इस बार आयोग की ओर से एक महत्वपूर्ण और बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जिसके तहत मतपत्रों (बैलेट पेपर्स) को द्विभाषी (दो अलग-अलग भाषाओं) में छापने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
इस नई योजना के अनुसार, जम्मू संभाग में मतदाताओं की सुविधा के लिए मतपत्र अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी में छापे जा सकते हैं, जबकि कश्मीर संभाग में इन्हें अंग्रेजी के साथ उर्दू भाषा में उपलब्ध कराने की मांग पर अंतिम मंथन चल रहा है।
अगले कुछ दिनों में अंतिम फैसला, जानें चुनाव का पूरा तरीका
राज्य निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, भाषाओं के चयन और छपाई को लेकर संबंधित नागरिक प्रशासन के साथ उच्च स्तरीय विचार-विमर्श जारी है, जिस पर अगले कुछ दिनों में अंतिम मुहर लग जाएगी।
उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर के स्थानीय चुनावों में दो अलग-अलग प्रणालियों का उपयोग किया जाता है:
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मतपत्र (बैलेट पेपर): ग्रामीण क्षेत्रों के त्रिस्तरीय निकाय यानी पंचायत, ब्लॉक विकास परिषद (BDC) और जिला विकास परिषद (DDC) के चुनाव मतपत्रों के माध्यम से कराए जाते हैं।
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ईवीएम (EVM): शहरी क्षेत्रों के नगर निगम और नगर निकाय चुनावों के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का इस्तेमाल होता है।
2023-2024 से खाली पड़े हैं सदन, 72 लाख से अधिक हैं मतदाता
जम्मू-कश्मीर में स्थानीय निकायों का कार्यकाल काफी समय पहले ही समाप्त हो चुका है। शहरी नगर निकायों का कार्यकाल जहां नवंबर 2023 में खत्म हुआ था, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों और बीडीसी का कार्यकाल जनवरी 2024 में और डीडीसी का कार्यकाल फरवरी 2024 में पूरा हो चुका है। तब से इन संस्थाओं की कमान प्रशासकों के हाथों में है।
आयोग ने पिछले महीने ही नई और अपडेटेड मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन कर दिया है, जिसके अनुसार वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में कुल पंचायत मतदाताओं की संख्या 72.24 लाख पहुंच चुकी है। इसके साथ ही चुनाव से जुड़ी 'मैनुअल बुक' को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है।
पंजाब और हिमाचल प्रदेश जाएगी अफसरों की स्पेशल टीम
पूरी चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से प्रदेश चुनाव आयोग ने एक और बड़ा कदम उठाया है। आयोग अपने वरिष्ठ चुनाव अधिकारियों का एक विशेष अध्ययन दल (टीम) पड़ोसी राज्यों पंजाब और हिमाचल प्रदेश भेजने जा रहा है। यह टीम हाल ही में इन दोनों राज्यों में संपन्न हुए स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों के सफल मॉडल, सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्रबंधन का बारीकी से अध्ययन करेगी, ताकि उन बेहतरीन तकनीकों को जम्मू-कश्मीर में भी लागू किया जा सके।
दूसरी ओर, चुनावों की सुगबुगाहट तेज होते ही नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, बीजेपी और कांग्रेस सहित जम्मू-कश्मीर के तमाम राजनीतिक दलों ने भी अपनी जमीनी और संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर दी हैं और जिताऊ उम्मीदवारों की कतार तैयार करने में जुट गए हैं।

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