ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनौती देंगे जयवर्धन सिंह
भोपाल । केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनौती देने के लिए कांग्रेस पूर्व मंत्री और विधायक जयवर्धन सिंह पर दांव लगाने की रणनीति पर काम कर रही है। सूत्रों का कहना है कि ग्वालियर-चंबल अंचल के साथ ही पूरे प्रदेश में सिंधिया के सामने जयवर्धन को चुनौती के रूप में खड़ा किया जाएगा। इसके लिए उन्हें केंद्रीय संगठन यानी एआईसीसी में पद दिया जा सकता है।
गौरतलब है कि पहले विधानसभा और फिर लोकसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस ने अपने प्रदेश संगठन में बदलाव किया था। अब अटकलें लगाई जा रही हैं कि कांग्रेस एआईसीसी की टीम में कुछ नए चेहरों को शामिल कर सकती है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मप्र से कांग्रेस के दो नेताओं को एआईसीसी की टीम में शामिल किया जा सकता है। ये हैं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरूण यादव और विधायक जयवर्धन सिंह।
इस लिए मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी
मप्र की राजनीति में चर्चा चल रही है कि अरुण यादव और जयवर्धन सिंह को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। यह दोनों ही नेता अपने-अपने क्षेत्र में पकड़ रखते हैं। अरुण यादव लंबे समय से कांग्रेस में जिम्मेदारी की तलाश में हैं। अरुण यादव लगातार चुनाव भी हार चुके हैं जिसके बाद माना जा रहा है कि अब उनको संगठन में जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि यह अभी अटकलें हैं। सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी एआईसीसी की नई टीम में युवाओं और अनुभवियों को मौका देना चाहते हैं। मप्र से पूर्व पीसीसी चीफ और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव के पास लंबे समय से कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं है। विधानसभा चुनाव में अरुण यादव के समर्थक चुनाव हार गए। लोकसभा चुनाव में भी वह अपने क्षेत्र में पार्टी को जीत नहीं दिला पाए। अरुण यादव के छोटे भाई सचिन यादव अभी विधायक हैं। यादव चेहरे के तौर पर अरुण यादव को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश में ओबीसी वर्ग को साधने के लिए पार्टी अरुण यादव को आगे कर सकती है। जयवर्धन सिंह अभी राघौगढ़ विधानसभा सीट से विधायक हैं। वह लगातार तीसरी बार चुनाव जीते हैं। जयवर्धन सिंह पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के बेटे हैं। वह ग्वालियर चंबल की सियासत में एक्टिव हैं। ऐसे में पार्टी उन्हें ज्योतिरादित्य सिंधिया की काट के रूप में प्रोजेक्ट कर सकती है।
सिंधिया की काट जयवर्धन
जयवर्धन सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों का ही संबंध राजपरिवार से है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर रियासत के महाराज हैं तो जयवर्धन सिंह राघौगढ़ राजघराने से संबंध रखते हैं। दोनों का ग्वालियर-चंबल की राजनीति में अच्छा खासा प्रभाव है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोडक़र बीजेपी में शामिल होने के बाद इस इलाके में कांग्रेस के पास कोई बड़ा चेहरा नहीं है ऐसे में कांग्रेस जयवर्धन सिंह पर दांव लगा सकती है। कांग्रेस छोडक़र भाजपा में आने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया का कद बढ़ा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया मोदी सरकार में दूसरी बार केंद्रीय मंत्री हैं। उन्हें दूरसंचार विभाग का मंत्री बनाया गया है। इसके साथ ही सिंधिया के कई समर्थक विधायक मोहन यादव की कैबिनेट में मंत्री हैं। हाल ही में भाजपा ने जिला अध्यक्षों की घोषणा की है। इसमें सिंधिया समर्थक कई नेताओं को जगह मिली है।

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